कॉलोनियों में प्लॉट लेने वाले लोग कीचड़ में रहने को मजबूर
सागर. शहर में अवैध कॉलोनियों का कारोबार जमकर फलफूल रहा है. वहीं नगर निगम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं. इतना ही नहीं कॉलोनाइजर्स को कानून का भी डर नहीं है. अवैध कॉलोनी काटने का यह कृत्य मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इन अपराधों के लिए 7 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। साथ ही भूखंडों का किया गया क्रय-विक्रय शून्य हो सकता है।
झूठे दावे करके आम लोगों को फंसा रहे
नगर के तिली वार्ड, अंबेडकर वार्ड, बाघराज वार्ड, विट्ठल नगर वार्ड, संत रविदास वार्ड, भोपाल रोड सहित कई वार्डों में अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं. यहां सड़क और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. कॉलोनाइजर्स झूठे दावे करके आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं. कई कॉलोनियों का डायवर्सन भी नहीं हुआ है और प्लॉट बिकना शुरू हो गए हैं.
लगातार बढ़ रही हैं अवैध कॉलोनियों की संख्या
नगर निगम प्रशासन ने 3 सालों में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को नोटिस तो दो बार दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की. 2022 में अवैध कॉलोनियां की संख्या 104 थी, जो 2023 में बढ़कर 148 तक पहुंच गई. स्थिति यह है कि कॉलोनियों में प्लॉट लेने वाले लोग कीचड़ में रहने मजबूर हैं. पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उन्हें उपलब्ध नहीं हैं. नगर से लगे कई इलाकों में अवैध कॉलोनियों का जाल बेहद तेजी से फैल रहा है.

